Home From The Editor बिहार के युवाओं के हृदय में स्पंदित होने लगा है-‘आइए,मिलकर प्रेरित करें बिहार’।

बिहार के युवाओं के हृदय में स्पंदित होने लगा है-‘आइए,मिलकर प्रेरित करें बिहार’।

by HE Times

त्यक्ष रूप से मनुष्य आज भी भावनाओं और स्नेह को अपने जीवन में रखना चाहता है। इसका स्पष्ट उदाहरण तब देखने को मिलता है, जब देश के युवा किसी भी खेल का नेतृत्व करते है और राष्ट्र एक होकर तालियाँ बजाता हैं। युवाओं के हृदय आज संकुचित होते जा रहे, आज भारत का युवा केवल संकुचन और भय के वातावरण के कारण अपनी प्रतिभा नहीं दे पा रहा,  समाज को रचनात्मक बनाने में अपनी भूमिका को संदेह के दायरे में रख रहा। जो राज्य जितना ही जात-पात,धर्म और ऊंच-नीच के भाव से ग्रसित है, उस राज्य के युवाओं का हाल भी संकुचित ही है।
आज जिस प्रकार ‘आइए,मिलकर प्रेरित करें बिहार नाम’ से विकास वैभव आईपीएस ने युवाओं को जागृत करने हेतु अभियान छेड़ रखा है,निश्चित ही युवा पीढ़ी अपनी प्रतिभा खुल कर देंगे और समाज को मजबूत करने में अपना बहमूल्य योगदान देंगे। देखकर ख़ुशी हो रही कि इस पवित्र यज्ञ में सब साथ मिलकर आगे बढ़ रहे और इसका सम्पूर्ण श्रेय प्रतिभाशाली,योग्य और कर्मठता की पहचान बन चुके विकास वैभव का है। बिहार विकास वैभव के कठिन परिश्रम का सदैव ऋणी रहेगा। विकास जी से प्रेरणादायक ज्ञान लेकर साथ ही सब मिलकर और हर फूल को चुनकर एक माला का निर्माण कर सकते हैं।
विकास वैभव का आत्मविश्वास!
यूं तो, युवाओं के मार्गदर्शन हेतु माता-पिता और गुरुजन ही काफ़ी है। पर, जिस प्रकार से भारत की जनसंख्या बढ़ रही और प्रतिस्पर्धा बढ़ीं हैं। युवाओं का हृदय छणभंगुरता घारण कर मानसिक वेदना और पीड़ा से ग्रसित होते जा रहा। उस समय उनको सहारे की आवश्यकता होती है, किसी छाए की आवश्यकता होती है। कुछ जो नसीब वाले है, वो तो अपना भविष्य सुधार लेते है पर अधिकांशतः  अपने लक्ष्य से भटक जाते है और क्षमता के विपरीत काम करने को मजबूर हो जाते है। आज विकास वैभव युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत का काम कर रहें। एक प्रार्थना है जो सटीक उदाहरण देता है-‘सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को मिल जाए तरुवर की छाया’।
आज का अभियान आइए,मिलकर प्रेरित करें बिहार! विकास वैभव  ने युवाओं के लिए तरुवर का निर्माण कर दिया है, जिसके नीचे ज्ञान और बुद्धि की शीतलता का अनुभव आज का युवा पीढ़ी कर रहा। जो भी इस अभियान से जुड़ा है उसे मानसिक शुकून का अनुभव हो रहा कि आने वाली पीढ़ी और अपनी मातृभूमि के लिए कुछ करने का मौका विकास वैभव ने उनको दिया है। देखे तो यह अभियान पांच शब्दों से मिलकर बना है पर ये पांच शब्द हमारी उंगलियाँ है जो मिलकर मुट्ठी का निर्माण करता है। एकता का प्रतीक है। जो भी हवा और पानी विकास वैभव ने अपनी मातृभूमि से लिया उसे वो लौटा रहे, पूरी निष्ठा और ईमानदारी से उनकी मेहनत और सोच की फसल को हम सब को मिलकर सींचना है और एक सुंदर पहल निरन्तर पूर्ण सार्थकता के साथ करते रहना है।
‘आइए,मिलकर प्रेरित करें बिहार’ एक अभियान है, जो शैने-शैने अपनी रफ्तार पकड़ रहा। इसी तहत एक ईमानदार भाव हर प्रेरक के अंदर विराजमान हो! हम सब के मार्गदर्शक विकास वैभव, वैदिक विचार और संस्कृति को हम सब के सामने रखते रहे है, बिहार की प्राचीन गौरवशाली इतिहास के अंतर्गत बिहार की संस्कृति, कला, धार्मिक स्थिति और आर्थिक विकास को श्री विकास वैभव हम सब को समय समय पर रूबरू कराते आएं है। इस ज्ञानदीप को हम सब को बिहार के कोने कोने में पहुंचाना हैं। इसके लिए खुद के हृदय में एक बिज़ मन्त्र होना जरूरी है।यूं तो, दीप प्रज्वलित करते समय इस मंत्र का उच्चारण हम करते है-‘शुभं करोति कल्याणम् आरोग्यम् धनसंपदा। शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपकाय नमोऽस्तु ते।। दीपो ज्योति परं ब्रह्म दीपो ज्योतिर्जनार्दन:। दीपो हरतु मे पापं संध्यादीप नमोऽस्तु ते।। मंत्र जप करने वाले साधक के चेहरे पर एक अपूर्व तेज छलकने लगता है, चेहरे पर एक अपूर्व आभा आ जाती है।
किसी भी छात्र और छात्रा के मन में ज्ञान दीप प्रज्वलित करते समय अगर गुरु के पास वैदिकमंत्र है,तो निश्चित ही ज्ञान सिद्धता प्राप्त कर ही लेता है। किसी मंत्र का जब जप होता है, तब अव्यक्त चेतना पर उसका प्रभाव पड़ता है। मंत्र में एक लय होती है, उस मंत्र ध्वनि का प्रभाव अव्यक्त चेतना को स्पन्दित करता है। मंत्र जप से मस्तिष्क की सभी नसों में चैतन्यता का प्रादुर्भाव होने लगता है और मन की चंचलता कम होने लगती है।
इस तरह मंत्र शक्ति से गुरु और शिष्य दोनों के मुख मंडल पर एक तेज़, प्रखर आभा मंडल का निर्माण हो जाता है और इसी आभा मंडल के प्रभाव से ईमानदारी, सत्यचरित्रता, कर्मठता,कोमलता और भी कई तरह की सिद्धियां उत्पन्न होने लग जाती है।
इस लेख का मर्म यहीं है कि मन्त्र अमर है और हर कार्य को सिद्ध करने में कारगर। विकास वैभव भी वैदिक मंत्र को लगभग प्रतिदिन ट्वीट करते हैं और मुझे ऐसा अनुभव हुआ कि काफ़ी प्रेरणा दायक होते हैं उनके ट्वीट। इसके लिए विकास वैभव को तहेदिल साधुवाद और हार्दिक शुभकामनाएं, शुध्द हृदय से वो ज्ञान हम सब के सामने रखते रहे, स्वस्थ रहे, यहीं ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ। आप सब भी उनके ट्विटर एकाउंट से जुड़े और ज्ञान को अपने आभा मंडल के चारों तरफ़ विस्तारित करे।
आईए, मिलकर प्रेरित करें ‘बिहार’ !
शब्दों की यात्रा जारी है, नाव और नाविक अलग-अलग जरूर है, पर विचार एक है। मंज़िल एक है। बखूबी हम अपने बिहार को उतना चाहते है जितना कभी चाणक्य ने भौहें टेढ़ी कर चाहा था। आर्यभट्ट और बाणभट्ट की अंगुलियों की जादू ने चाहा था। बिहार के युवाओं को जागृत करने हेतु, बिहार के लाल एक बौद्धिक पुलिस अधिकारी श्री विकास वैभव जी ने मुहिम छेड़ रखी है। इनके विषय में जितना कहाँ जाए कम ही होगा,इनकी जीवन भर की पूंजी है- ‘जमीर’,’ईमानदारी’,’कर्तव्यनिष्ठता’,’सत्यचरित्रता’, और ‘दृढ़ता’! ये सब गुण उनके आत्मबल के कारण हैं। यहीं आत्मबल एक अभियान बन चुका है, जो युवाओं के छुपे हुए गुण को निखारने के लिए क्रांति का सूत्रपात कर रहा।
उनका यह अभियान कर्ज चुका रहा इस मर्यादित बिहार का, थोड़ा सा अपना भी फ़र्ज़ बन रहा सो इस अभियान का मैं अंग बन रहा। आईए, मिलकर प्रेरित करें बिहार को।
देवत्व समान ऊर्जावान विकास वैभव”
प्राचीन ग्रन्थों से यह ज्ञान तथा अनुभव प्राप्त हुआ है कि कठिन परिश्रम और तपस्या से कोई भी साधारण मनुष्य असाधारण शक्तियों का मालिक हो जाता है। कठिन परिस्थितियों को वश में कर उनको जीवंत बनाने वाले बिहार के लाल विकास वैभव से जब-जब मिला उनके अंदर से निकलती देवत्व ऊर्जा का आभास हुआ। यह ऊर्जा किसी ईमानदार,कर्मठ सत्यचरित्र और संकल्पित व्यक्ति के अंदर से ही निकलती हैं। उनका आभार रहा जो अपने कीमती समय में से कुछ समय मिलने के लिए निकाला। उनके चेहरे पर मुस्कान अपनत्व का बोध  सहज ही करा जाता है।
सत्यनिष्ठ,कर्मठ, मृदुभाषी, तेज़तर्रार युवाओं के प्रेरणास्रोत एवं मार्गदर्शक, भारत के शान और बिहार के मान श्री विकास वैभव, पुलिस_महानिरीक्षक, वर्तमान में विशेष सचिव,गृह विभाग, बिहार के पद पर अपनी सेवा दे रहे। ईश्वर से प्रार्थना है कि वे स्वस्थ रहे और देश के युवाओँ के प्रेरणास्रोत सदैव बने रहे।
यह मेरी रचना बिहार के तेज़तर्रार पुलिस अधिकारी विकास वैभव को समर्पित है।
जी रहे दूसरों के लिए
बन रहे स्वाभिमान!
भारत के सपूत हो कर्मठता की पहचान!
मष्तिष्क पर शीतलता थामे,
आंखों में अंगारे,
दूर कर रहे व्यवधान!
जी रहे दूसरों के लिए,
बन रहे स्वाभिमान!
युवाओं के प्रेरणा बन
छोड़ रहे पद चिन्ह निशान!
जी रहे दूसरों के लिए,
बन रहे स्वाभिमान!
मां के आंचल के कर्ज चुकाते,
जीवन सार्थक कर,
बन रहे कर्मवान! धर्मवान!
जी रहे दूसरों के लिए,
बन रहे स्वाभिमान!
रब से प्रार्थना कर रहा,
ये विकास वैभव आप जैसा ही बने,
हर बच्चा और इंसान!
जी रहे दूसरों के लिए,
बन रहे स्वाभिमान!
गर्व है बिहार को,
फर्ज पर अड़े हुए मिट्टी का कर्ज चुका रहे,
ऐसा कह रहा हर जुबान!
जी रहे दूसरों के लिए,
बन रहे स्वाभिमान!
जय हिंद जय बिहार
राहुल कुमार सिंह, राजनीतिक लेखक

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