Home Environment पर्यावरण के साथ आपकी सेहत के लिए भी खतरनाक है सिंगल यूज प्लास्टिक!

पर्यावरण के साथ आपकी सेहत के लिए भी खतरनाक है सिंगल यूज प्लास्टिक!

by HE Times
ज हमारे देश में प्लास्टिक के प्रतिबंध को लेकर काफी चर्चाएँ हो रही हैं, क्योंकि भारत सरकार ने इस पर एक फरमान जारी कर दिया है कि महात्मा गांधी जी कि आने वाली 150 वीं वर्षगांठ पर वे सिंगल यूज प्लास्टिक यानि एक बार उपयोग होने वाली प्लास्टिक को पूरी तरह से बंद करने की शुरुआत करने जा रहे हैं।
दिल्ली सरकार के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने भी सिंगल यूज प्लास्टिक वस्तुओं के उपयोग को रोकने के लिए जागरुकता अभियान की घोषणा की है । दिल्ली सरकार ने यह निर्णय लिया हैं कि 1 जुलाई से लेकर 3 जुलाई तक त्यागराज स्टेडियम में सिंगल यूज प्लास्टिक के अन्य विकल्पों को बढ़ावा देने के लिए 3 दिवसीय मेले का आयोजन किया जाएगा।
क्या होता है सिंगल यूज प्लास्टिक
चालीस माइक्रोमीटर (माइक्रॉन) या उससे कम स्तर के प्लास्टिक को सिंगल यूज प्लास्टिक कहते हैं। इसका मतलब प्लास्टिक से बनी उन चीजों से है जो एक बार ही उपयोग में लायी जाती हैं और उसके बाद फेंक दी जाती हैं।
सिंगल यूज प्लास्टिक को हम डिस्पोजेबल प्लास्टिक भी कह सकते हैं। इसका मतलब यह हैं कि जब हम किसी ऐसे तरह के प्लास्टिक से बने उत्पादों का उपयोग करते हैं जिसे हम एक बार इस्तेमाल करने के बाद दोबारा किसी उपयोग में नहीं ले सकते हैं वे सभी उत्पाद सिंगल यूज प्लास्टिक वाले उत्पाद होते हैं। इस तरह के उत्पादों का मुख्य रूप से आधार पेट्रोलियम होता हैं। इसमें पैसे बहुत कम लगते हैं, इसलिए आज यह सबसे ज्यादा उपयोग किया जाने वाला उत्पाद बन गया हैं। हालांकि इसे खरीदने एवं यूज करने में ज्यादा खर्च नहीं होता हैं लेकिन आपको यह बता दें कि जब आप इसे एक बार उपयोग करने के बाद फेक देते हैं तो इसका कचरा, उसकी सफाई और उसे नष्ट करने के लिए बहुत अधिक पैसे खर्च हो जाते हैं. और इससे जो दुनिया को नुकसान होता हैं वह अलग।
सिंगल यूज प्लास्टिक से होने वाले और नुकसानों के बारे में आपको बतायें उससे पहले यह जान लीजिये कि यह प्लास्टिक कास्नोजेनिक होता है और इसमें कैंसरकारक रसायन होते हैं। आपने बहुत बार देखा होगा कि सड़कों पर गाय, कुत्ते या अन्य छुट्टा जानवर कचरा खा रहे होते हैं। इस कचरे में सिंगल यूज प्लास्टिक भी होता है जोकि इन जानवरों के पेट में जाने के बाद इकट्ठा होता रहता है क्योंकि यह पच नहीं सकता। कुछ दिनों बाद यह जानवर बीमार होने लगते हैं और तड़पते हुए दम तोड़ देते हैं।
जमीन पर जानवरों के सिंगल यूज प्लास्टिक से परेशान होने तक ही बात सीमित नहीं रह गयी है बल्कि इससे समुद्री जीव भी प्रभावित हो रहे हैं। एक हालिया अध्ययन के मुताबिक प्लास्टिक का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा महासागरों में फैला हुआ है। यह अध्ययन रिपोर्ट कहती है कि सिर्फ एक प्रतिशत प्लास्टिक कचरा हमें समुद्र तल पर दिखाई देता है जबकि 99 फीसदी समुद्री जीवों के पेट में या समुद्र तल में जा चुका है। प्लास्टिक से नदियों, झीलों, तालाबों के जीवों को बहुत नुकसान होता है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक प्लास्टिक की वजह से हर साल लगभग 11 लाख समुद्री पक्षियों और जानवरों की मौत होती है, यही नहीं 90 फीसदी पक्षियों और मछलियों के पेट में प्लास्टिक मिला है। दरअसल जब समुद्र के अंदर समुद्री जीव भोजन की तलाश में निकलते हैं तो अनजाने में प्लास्टिक का सेवन कर जाते हैं। और यही एक बड़ा कारण है कि आज लगभग 700 समुद्री जीव लुप्त होने की कगार पर पहुँच गये हैं। यहाँ यह आंकड़ा गौर करने लायक है कि जितने प्लास्टिक का उपयोग होता है उसका करीब 91 फीसदी रिसाइकल नहीं होता यानि समस्या कितनी विकराल है इसका अंदाजा लगाया जा सकता हैं।
प्लास्टिक के स्थान पर किन चिजों का करें इस्तेमाल ?
सब्जी फल और बाजार से अन्य सामान लाते समय कपड़े, जूट या अखबार के बैग का इस्तेमाल करें। प्लास्टिक के डिस्पोजेबल बर्तनों का बहिष्कार करें। इसके स्थान पर मिट्टी के गिलासों, पत्तलों, कांच, कागज और स्टील के बर्तन इस्तेमाल कर सकते हैं। प्लास्टिक की थैलियों को सिर्फ कचरे के डिब्बे में डाले ताकि उसका रीसायकल हो सके और जानवरों के मुँह में न जाएं तथा मिटटी पानी को प्रदूषित न कर सके। घर से ही स्टील या कांच की बोतल में पीने का पानी लेकर निकलें। बाजार में मिलने वाला पानी सभी सही क्वालिटी की प्लास्टिक बोतलों में नहीं होता और काफी दिनों तक रखे रहने के कारण पानी में प्लास्टिक के दूषित केमिकल्स मिल जाते हैं। हाइडेन्सिटी पॉलिथीन को स्वास्थ्य के लिए ठीक बताया जा रहा है और इसका इस्तेमाल दूध, जूस, पानी, दवा इत्यादि रखने के लिए किया जाता है।
अंततःनिष्कर्ष पर पहुंचते हैं कि प्लास्टिक एक ऐसा पदार्थ हैं जोकि कुछ रसायन से बना होता हैं. इसलिए इसका उपयोग करना मतलब प्रकृति को नुकसान पहुँचाना हैं और इससे मनुष्य के साथ-साथ जानवरों का जीवन भी संकट में डालना हैं। इसलिए हमारी यह कोशिश होनी चाहिए कि हम प्लास्टिक का उपयोग बंद कर इससे फैलने वाले प्रदूषण से खुद को एवं दुनिया को बचाएं।

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